काम के साथ अच्छा व्यवहार भी जरूरी : राकेश श्रीवास्तव

पिछले दिनों आपने सब टीवी के एक बेहद मशहूर सीरियल 'लापतागंज' में लल्लन जी को जरूर देखा होगा, और उनका खास डायलॉग -हमसे तो किसी ने कहा ही नहीं- बच्चे बच्चे की जबान पर है।

काम के साथ अच्छा व्यवहार भी जरूरी : राकेश श्रीवास्तव
राकेश श्रीवास्तव

पिछले दिनों आपने सब टीवी के एक बेहद मशहूर सीरियल 'लापतागंज' में लल्लन जी को जरूर देखा होगा, और उनका खास डायलॉग -हमसे तो किसी ने कहा ही नहीं- बच्चे बच्चे की जबान पर है।

लल्लन जी यानी राकेश श्रीवास्तव जी 'लापतागंज' से पहले भी कई टीवी सीरियल और फिल्मों में महत्वपूर्ण किरदार निभा चुके हैं, लेकिन स्क्रीन पर आने से पहले उन्होंने नाट्य मंचों पर अपनी कला का जलवा खूब बिखेरा है। 

राकेश के पिताजी रिजर्व बैंक में थे, जिसके चलते इन्हें देश के कई शहरों में घूमने का मौका मिला और इसकी वजह से राकेश में आत्मविश्वास या फिर यूं कहें कि कुछ कर गुजरने का दृढ़ विश्वास था। जगह-जगह घूमने से राकेश को एक्सपोजर भी बहुत मिला, जिसका इन्हें अभिनय की दुनिया में बहुत लाभ मिला। 

मूलत: लखनऊ के रहने वाले राकेश श्रीवास्तव को पटना में एक बांग्ला स्कूल में पढ़ते समय, जहां पर थियेटर, नाटक और रविन्द्र संगीत का कार्यक्रम आयोजित होता था, इनका रुझान नाटक और संगीत की तरफ हुआ। इसमें राकेश का मन इतना रमा कि आगे चलकर इन्होंने न सिर्फ इसे अपनी जीविका का साधन बनाया, बल्कि खूब नाम भी बटोरा। 

लखनऊ में ग्रैजुएशन करते समय राकेश श्रीवास्तव भारतेन्दु नाट्य अकादमी से जुड़े, जहां पर उन्होंने दो साल का डिप्लोमा किया, फिर पोस्ट डिप्लोमा किया। वहीं पर इन्होंने टेलीविजन और थियेटर किया, साल भर के बाद वहां ड्रामा स्कूल में पढ़ाने लगे। करीब सवा दो साल तक वह इसमें जुटे रहे। बाद में संगीत महाविद्यालय से संगीत मूल्यांकन का कोर्स किया, क्योंकि राकेश को अच्छे संगीत की समझ है और ये अच्छे संगीत श्रोता बनना चाहते थे। इसके बाद राकेश ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में फिल्म मूल्यांकन का कोर्स किया। अपने मन की बात सुनकर राकेश ने वहीं से वापस लखनऊ न जाकर मुंबई का रुख किया और फिर शुरू हुआ राकेश श्रीवास्तव का फिल्मी सफर। हालांकि ये सफर संघर्ष से भरा हुआ था। राकेश संघर्ष को प्रयास बोलना ज्यादा सही समझते हैं, क्योंकि ये शब्द सकारात्मकता से भरा हुआ है। 

मुंबई आने और काम मिलने से पहले के दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। निजी चैनल उस समय शुरू हो रहे थे, इसलिए काम मिलना आसान नहीं था। तब राकेश ने डबिंग और वॉयस ओवर करना शुरू किया, जिससे मकान का किराया और बाकी जरूरतें पूरी हो जाती थीं। अपने एक्टिंग के गुरु अनुपम खेर से गुरुमंत्र के रूप में राकेश ने हर प्रोडक्शन हाउस में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू की। जिससे इन्हें आगे काम मिलने में आसानी हुई। 

मुंबई में आने के बाद राकेश को सबसे पहले जो फिल्म मिली उसका नाम था 'एक लड़का एक लड़की', जिसमें सलमान खान, नीलम और अनुपम खेर ने काम किया था। 'देख भाई देख' और 'बाप रे बाप' जैसे सीरियलों से राकेश श्रीवास्तव ने काम की शुरुआत की है। एक बार शुरुआत हो जाने के बाद गाड़ी चल निकली और राकेश घर घर में लोगों द्वारा पहचाने जाने लगे। 

फिलहाल इन दिनों राकेश ने टीवी की दुनिया से कुछ समय के लिए विराम लिया है और लघु फिल्में, वेब सीरीज के साथ फीचर फिल्मों में अपना ध्यान लगा रहे हैं। राकेश मानते हैं कि आज चैनलों के बढ़ने के कारण लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा काम मिल रहा है, जिसकी वजह से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और ये प्रतिस्पर्धा दर्शकों को अच्छे मनोरंजन जरूर मुहैया करवाएगी। 

राकेश मानते हैं कि आप में अभिनय प्रतिभा के साथ-साथ आपका व्यवहार भी बहुत अच्छा होना चाहिए, क्योंकि जैसे आप अच्छे काम की तलाश में रहते हैं, वैसे ही प्रोडक्शन हाउस भी अच्छे कलाकारों की तलाश में रहते हैं। मनोरंजन की दुनिया में आने वाले दिनों में लोगों को बहुत अच्छा मनोरंजन देखने को मिलेगा, ऐसा राकेश श्रीवास्तव का मानना है। 


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